कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएंगे,
आजाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे
हटने के नहीं पीछे, डरकर कभी जुल्मों से
तुम हाथ उठाओगे, हम पैर बढ़ा देंगे
बेशस्त्र नहीं हैं हम, बल है हमें चरख़े का,
चरख़े से ज़मीं को हम, ता चर्ख़ गुंजा देंगे
परवाह नहीं कुछ दम की, ग़म की नहीं, मातम की,
है जान हथेली पर, एक दम में गंवा देंगे
उफ़ तक भी जुबां से हम हरगिज़ न निकालेंगे
तलवार उठाओ तुम, हम सर को झुका देंगे
सीखा है नया हमने लड़ने का यह तरीका
चलवाओ गन मशीनें, हम सीना अड़ा देंगे
दिलवाओ हमें फांसी, ऐलान से कहते हैं
ख़ूं से ही हम शहीदों के, फ़ौज बना देंगे
मुसाफ़िर जो अंडमान के, तूने बनाए, ज़ालिम
आज़ाद ही होने पर, हम उनको बुला लेंगे...
BAS AB MAA
मैं तन पर ला दे फिरता दुसाले रेशमी
jub tak tu mera tha tub tak me teri thi
Ha us vaktt tak me teri thi
ae mere watan
ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन तुझ पे दिल कुरबान तू ही मेरी आरजू़, तू ही
ajnabee the or ajnabee hai
मेरी आँखो का हर आँसू तेरे प्यार की निशानी है,जो तू समझे तो मोती है, ना समझे तो
nafrat kabhi bhi mat karna
Nafrat Kabhi Na Karna Hum Se,
PARIWAR HUM DO PAR HI SIMAT GAYA
जिन काले घने बालों पर इतराते थे हम कब उनको रंगना शुरू कर दिया पता ही नहीं चला|
If I Were To Write A Poem
If I were to write a poem,
dharam apne bhasha ki izat karte hai
अपने धर्म, देश, भाषा की, जो इज़्ज़त करते हैं,
hamari yaad ati hai
wo zindgi hi kya jisme mohobbat na ho.
NA RAAT DEKHI NA DIN
चाँद को भी हमने तुम्हारे लिए सजाया है