रात की इस ख़ामोशी में
इस कलम की सरगोशी में
मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हु।
यूह तोह मेरी होके भी यह कलम
तुम्हारी ही बातें करती है सनम
चाहती हु आज यह मेरी सुने
मेरी भी आज यह लिखे
वोह बात जो मैं बताना चाहती हु।
मालुम है तुम इसे नादानी कहते हो
कुछ मेरे इश्क़ की बदनामी कहते हो
बे-पायान होती है मोहोब्बत कुछ को
तुम्हे समझाना चाहती हु।
तुम्हारे साथ होके भी
तुम्हसे दूर रहके भी
इस बे-बाक मोहोब्बत को,
बिना किसे शिकायत के करना जानती हु।
इन आँखों की नमी में
अल्फाज़ो की कमी में
बस यही कहना चाहती हु;
इश्क़ मंज़िल है यह,
कोई राह नहीं जो मोड़ना चाहती हु।
कभी हंसाती है तो कभी रुलाती है जिंदगी
ऐसी कहाँ मेरी किस्मत कि आपका प्यार हम
Life and death; without one there cannot be the other.
For some, it's short, but they liv
Your smile makes me smile,
Your laugh makes me laugh.
Your eyes are enchanting.
अरूजे कामयाबी पर कभी तो हिन्दुस्तां
Shall we take Fall together,
go sifting through the fallen leaves
and gaze upon t
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
प्यारी जग से न्यारी माँ,
खुशियां द
यदि एक औरत
अपने आत्मसम्मान के ल
मालूम है मुझे की मैं कुछ भी लिखु तुम इ