जहां तेरे पैरों के कँवल गिरा करते थे
हँसे तो दो गालों में भँवर पड़ा करते थे
तेरी कमर के बल पे नदी मुड़ा करती थी
हंसी को सुनके तेरी फ़सल पका करती थी
जहाँ तेरी एड़ी से धूप उड़ा करती थी
सुना है उस चौखट पे अब शाम रहा करती है
लटों से उलझी लिपटी रात एक हुआ करती थी
कभी कभी तकिये पे वो भी मिला करती है
कहीं तुम्हें परबत लड़वा दे, कहीं लड़ा
It's getting late, I must go
I had a beer where did it go
I had to pee. I know it
Don't be worried about the past.
Things like that never last.
We're better than y
A million stars up in the sky.
One shines brighter - I can't deny.
A love so prec
Tears of blood fall from my
LIKHTI HU TUMHARE INTEZAAR MAI
लिखती हूँ मैं,
तेरे इजहार का इंतजा
अपना निवाला छोड़कर मेरी खातिर तुमने
एक पहल रिश्ते की ओर (कविता का शीर्षक )
अरूजे कामयाबी पर कभी तो हिन्दुस्तां
Dosti Dard Nahi Khushiyon Ki Saugat Hai,
Kisi Apne Ka Zindgi Bhar Ka Saath Hai,
Y