जहां तेरे पैरों के कँवल गिरा करते थे
हँसे तो दो गालों में भँवर पड़ा करते थे
तेरी कमर के बल पे नदी मुड़ा करती थी
हंसी को सुनके तेरी फ़सल पका करती थी
जहाँ तेरी एड़ी से धूप उड़ा करती थी
सुना है उस चौखट पे अब शाम रहा करती है
लटों से उलझी लिपटी रात एक हुआ करती थी
कभी कभी तकिये पे वो भी मिला करती है
Naram labon ki jo chhooe hai dastak
Pehloo me koi gulzar hai
Fir hai Mohabbat us
The past is the past for a reason.
That is where it is supposed to stay,
But some
Last night at dinner we had some fish,
and though I tried, I did not finish.
My m
कैसी उठी है दिल में, शरारत नई-नई…२
karne lage hai hum khud se pyar
Zindagi ne, is kaddar, kiya hai, bas vaar
Bina koi, churee, ya koi,&nbs
अपना निवाला छोड़कर मेरी खातिर तुमने à
हर सुख दुःख में, साथ साथ जीया करते थे।<
Sometimes I get lonely
Instagram, Twitter, Facebook
Always connecting but not con
वह खून कहो किस मतलब का
जिसमें उबाल
अमरपुरी से भी बढ़कर के जिसका गौरव-गान