जहां तेरे पैरों के कँवल गिरा करते थे
हँसे तो दो गालों में भँवर पड़ा करते थे
तेरी कमर के बल पे नदी मुड़ा करती थी
हंसी को सुनके तेरी फ़सल पका करती थी
जहाँ तेरी एड़ी से धूप उड़ा करती थी
सुना है उस चौखट पे अब शाम रहा करती है
लटों से उलझी लिपटी रात एक हुआ करती थी
कभी कभी तकिये पे वो भी मिला करती है
रख हौसला वो मंजर भी आयेगा,
प्यासे क
A person who will listen and not condemn,
Someone on whom you can depend.
They wi
ना मुसलमान खतरे में है, ना हिन्दू खतर
शोर दुनिया का एक तरफ है , दिल की वीरानी
एक पहल रिश्ते की ओर (कविता का शीर्षक )
कान्हा की कला पे रीझकर भक्ति भावना
<Ever since
I laid eyes on you,
I knew for a fact
This was a dream come tr
Go into this week
with the attitude that
your peace,
your health of mind,
बीती विभावरी जाग री!
अम्बर पनघट मे
I've lost a piece and it's impossible to bring it back.
I was too careless. I was too sla