जहां तेरे पैरों के कँवल गिरा करते थे
हँसे तो दो गालों में भँवर पड़ा करते थे
तेरी कमर के बल पे नदी मुड़ा करती थी
हंसी को सुनके तेरी फ़सल पका करती थी
जहाँ तेरी एड़ी से धूप उड़ा करती थी
सुना है उस चौखट पे अब शाम रहा करती है
लटों से उलझी लिपटी रात एक हुआ करती थी
कभी कभी तकिये पे वो भी मिला करती है
You are blinded by shame
For all you have done
It hurts me so bad
That I
एक बार हिम्मत जुटाया भी
लेकिन मात
क्या जिंदगी सच में किताब है
If you must go, then go for a while
Remember that the first step is a hard traveled mile.
kub tak door rahoge tum hum se
kab tak raho gay aakhir yun dur dur tum hum se,
aakhir tum milna hum se ek din zaroor,
एक पहल रिश्ते की ओर (कविता का शीर्षक )
मैं अकेला कब था ,मैं था और मेरी तनहाई थ
जब कोई ख्याल दिल से टकराता है
pita ki ek umid
आओ जिंदगी को गाते चले, कुछ बातें मन की