एक अजनबी तुम एक अजनबी हम अनजानी राहों में मिल जाएंगे
कुछ कहो तो सही गर बात होगी, तो तनहा न ये रात होगी
ये खामोश लब खुद-ब-खुद मुस्कुरायेंगे कुछ कहो तो सही
गमों को उतार इन एहसासों में डूबकर तो देखो ज़ख्म खुद-ब-खुद भर जाएंगे
कुछ कहो तो सही हाथों में हाथ होगा, एक-दूजे का साथ होगा
ये दृग-मेघ खुद-ब-खुद बरस जाएंगे कुछ कहो तो सही
वक्त के उन क्रूर पलों को बिसार दो कुछ इबादत तुम्हारी कुछ दुआ हमारी रंग लाएंगे
कुछ कहो तो सही ये असहज मौन न साधो क्या भरोसा इन लम्हों का कब बिछड़ जाएंगे
कुछ कहो तो सही ।
I messed up today, not something I wanted to do.
I ruined a relationship by going off on
I see people laughing and joking all around,
but on my face there is no smile; instead, t
एक पहल रिश्ते की ओर (कविता का शीर्षक )
NA JANE KISKA DIL SEENE SE CHHU PAY BAITHE HAI
जो चोट खाकर बैठे है वो शायर बन बैठे है&
ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन त
Har rishte me dosti nahi milti
हर रिश्ते में दोस्ती नहीं मिलती।
I was given a smile the other day
From someone who passed me on their way.
I wasn
दमकी उनकी रक्तिम काया!
आजानु-बाहु
एक पहल रिश्ते की ओर (कविता का शीर्षक )
I see you looking at your children,
Wondering what their lives will be.
If you ve