आज जीत की रात पहरुए! सावधान रहना
खुले देश के द्वार अचल दीपक समान रहना
२
प्रथम चरण है नये स्वर्ग का है मंज़िल का छोर
इस जन-मंथन से उठ आई पहली रत्न-हिलोर
अभी शेष है पूरी होना जीवन-मुक्ता-डोर
क्यों कि नहीं मिट पाई दुख की विगत साँवली कोर
ले युग की पतवार बने अंबुधि समान रहना।
जिस देश में गंगा बहती है
कुछ लोग जो
Who are you?
Where is the guy that I once knew?
Where did my friend go
an
एक पहल रिश्ते की ओर (कविता का शीर्षक )
I wish there were words to express how I feel,
But no words I see will do.
No wor
शाम की तरह हम ढलते जा रहे है,
बिना क
Look at the beauty in her eyes,
a glow that shines like the sunrise.
Her sm
नन्ही सी आंखें और मुड़ी हुई उंगलियां
दोस्त वो है जो बिन कहे समझ लेता है हर ब
कर गयी पैदा तुझे उस कोख का एहसान है
Tum ho ek anmol angoothi
Ya phir uska koi nageena
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