सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
जिन्दगी का राज-चर्चा अपने क़त्ल का
मिट गया जब मिटने वाला (अन्तिम रचना)
मुखम्मस-हैफ़ हम जिसपे कि तैयार थे मर जाने को
न चाहूँ मान दुनिया में, न चाहूँ स्वर्ग को जाना
हे मातृभूमि ! तेरे चरणों में सिर नवाऊँ
अरूज़े कामयाबी पर कभी तो हिन्दुस्तां होगा
भारत जननि तेरी जय हो विजय हो
ऐ मातृभूमि तेरी जय हो, सदा विजय हो
बला से हमको लटकाए अगर सरकार फांसी से-तराना
देश की ख़ातिर मेरी दुनिया में यह ताबीर हो
दुनिया से गुलामी का मैं नाम मिटा दूंगा
आज़ादी-इलाही ख़ैर ! वो हरदम नई बेदाद करते हैं
देश हित पैदा हुये हैं देश पर मर जायेंगे
कभी हंसाती है तो कभी रुलाती है जिंदगी
Na haath ek Shastra ho
Na haath ek astra ho
Na anna
What has happened is never spoken,
And everything around me has been broken.
Ther
You used me.
I thought you were the key,
But the truth is that you used me,
WO HUMDUM NAYI BEDAD KARTE HAI
इलाही ख़ैर! वो हरदम नई बेदाद करते हैं,
कभी धूप कभी छाया है
कभी सत्य कभी मा
tum gairoon ki baath karte ho,
humne apno kho aazmaya hai.
tum kaanto se bach ke
Main Tujhse Juda Hokar Kehta Bhi Kya.....???
Ke Tujhse Juda Hote Waqt, Mere Aankhon Mein
मैं तन पर ला दे फिरता दुसाले रेशमी