
एक पहल रिश्ते की ओर (कविता का शीर्षक )
सुनो… सुनो न!
कुछ तुम बदलो, कुछ हम बदलें
और बदलके इस रिश्ते को ढेर सारा प्यार देते हैं !
चलो न, वक़्त रहते इस रिश्ते को सवार लेते हैं!
जो गलतियां तुमने की हैं, जो गलतियां मैंने की हैं!
साथ बैठके आज उन्हें सुधार लेते हैं
चलो न, वक़्त रहते इस रिश्ते को सवार लेते हैं
प्यार तुमको भी है, प्यार हमको भी है
आओ इस बात को मन से स्वीकार लेते हैं!
Daru aur Cigarette peenewala insaan
kabhi matlabi
nahi hota...
Jise apni
जो कभी अपने समय को यों बिताते है नहीं
You make me feel so real
I lay awake at night thinking of you
I close my eyes and
कहते हैं कि दोस्ती का रिश्ता,
बडाह
अरूजे कामयाबी पर कभी तो हिन्दुस्तां
If you awake to one more dreary day,
an empty heart with empty hours to kill,
rem
Love. Is that what I crave?
If it is, then why can't I find it?
Hate. Does that m
होठों पे सच्चाई रहती है, जहां दिल में
From the first lingering glance
Shared by a pair of prying hearts
To the last diz