| यह हैं जिंदगी का सच,
जो चाहा कभी पाया नहीं|
जो पाया कभी सोचा नहीं,
जो सोचा कभी मिला नहीं|
जो मिला रास आया नहीं,
जो खोया वो याद आता हैं,
पर जो पाया संभाला जाता नहीं|
क्यों अजीब भी पहली हैं जिंदगी,
जिसको कोई सुल्जा पता नहीं|
एक दिन जब हम बिछड़ जाएंगे
हमेशा के
देर सवेर फिर से भोर हो गई,
रातों की
झुकी कमर सीधी की
माथे से पसीना पोछ
हे तीन रंग का तेरा परिधान हम हैं तेरे
Eyes glare of
the unexpected
staring far too long
the person that
Remember when we first did meet,
our hearts rejoiced and skipped a beat.
Remember
यदि एक औरत
अपने आत्मसम्मान के ल
It was a late night in September,
The beginning of autumn,
When the image of a st
जो भरा नहीं है भावों से
बहती जिसमे
एक पहल रिश्ते की ओर (कविता का शीर्षक )