गली गली में बजते देखे आज़ादी के गीत रे |
जगह जगह झंडे फहराते यही पर्व की रीत रे ||
सभी मनाते पर्व देश का आज़ादी की वर्षगांठ है |
वक्त है बीता धीरे धीरे साल एक और साठ है ||
बहे पवन परचम फहराता याद जिलाता जीत रे |
गली गली में बजते देखे आज़ादी के गीत रे |
जगह जगह झंडे फहराते यही पर्व की रीत रे ||
जनता सोचे किंतु आज भी क्या वाकई आजाद हैं |
भूले मानस को दिलवाते नेता इसकी याद हैं ||
Swatantrata ka samay ab aaya hai !
Uth mere veer javan uth,
Uth mere veer javan uth,
Lahlahaati is dharti me aaj,
एक पहल रिश्ते की ओर (कविता का शीर्षक )
Praise the spells and bless the charms,
I found April in my arms.
April golden, A
जो भरा नहीं है भावों से
बहती जिसमेà
Mujhe awaz De Dena
-hume Kabhi icecream lao to,
.Kabhi Murghi achhi pakao .to,
बच्चा-बच्चा बन जाए सैनिक, गर बुरी नजर à
I am broken,
Shattered into irreparable pieces.
Who is going to save me?
KOSHISH KARENGE HAM KI TUMKO TANHA
NAA HONE DE.... TERI ISS DIL KI 
प्यारी जग से न्यारी माँ,
खुशियां दà
हर मोड़ पर काटे बिझे है
हर कदम संभा